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Published in:

Volume 7 Issue 11
November-2020
eISSN: 2349-5162

Unique Identifier

JETIR2011112

Page Number

855-859

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Title

SHAILESH MATIYANI: ARDHANGINI AUR DAMPATYA PREM

ISSN

2349-5162

Cite This Article

"SHAILESH MATIYANI: ARDHANGINI AUR DAMPATYA PREM", International Journal of Emerging Technologies and Innovative Research (www.jetir.org), ISSN:2349-5162, Vol.7, Issue 11, page no.855-859, November-2020, Available :http://www.jetir.org/papers/JETIR2011112.pdf

Authors

Abstract

शैलेश मटियानी हिन्दी साहित्य में कथाकार के रूप में एक जाना-पहचाना नाम है। प्रेमचंद के बाद अगर किसी ने विपुल मात्रा और एक रचनात्मक वैभव के साथ साहित्य को अपनी सृजनात्मकता से समृद्ध किया, तो वो शैलेश मटियानी ही हैं। लगभग 30 कहानी संग्रह, लगभग 30 उपन्यास, 7 लोककथा संग्रह, 16 बाल साहित्य की पुस्तकें, 2 गाथा, 3 संस्मरण, वैचारिक निबंध की 13 पुस्तकें शैलेश मटियानी की लिखी हुई मिलती हैं। अगर इनको सिर्फ गिन लिया जाय तो सौ से ऊपर की संख्या होती है किताबों की। इतना विपुल लेखन करनेवाला साहित्यकार सिर्फ संख्या में ही नहीं बल्कि साहित्यिक और रचनात्मक मानदण्डों पर भी एक से एक रचनाएँ देता रहा। शैलेश मटियानी ने अपनी रचनाओं से हिन्दी कथा साहित्य को समृद्ध किया। ऐसी विपुल लेखन की प्रवृति बांग्ला भाषा के लेखकों में देखने को मिलती है। लेखन की यह विपुलता अक्सर पुनरावृत्ति और एकरसता का सबब बनती है। पर शैलेश मटियानी निरंतर विकसित होते गए, विषय-वैविध्य को बरकरार रखते हुए। तभी तो उनके निधन के बाद उनकी प्रतिभा और क्षमता पर बात करते हुए राजेंद्र यादव एक साक्षात्कार में कहते हैं – “वे (मटियानी) उन कहानीकारों में हैं जिनके पास सबसे अधिक संख्या में, 10-12 की संख्या में ए-वन कहानियाँ हैं। प्रेमचंद सहित सबके पास 5-6 से ज्यादा टॉप की कहानियाँ नहीं हैं जो कहानी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विश्वस्तर पर खड़ी हो सके। मेरे पास 2-4, भारती और राकेश के पास दो चार होंगी। बाकी की सब एक मिनिमम स्टैंडर्ड हैं परंतु जिसे आउटस्टैंडिंग कहानी कहते हैं वो नहीं है। उनके पास सबसे ज्यादा हैं। हमलोगों में सबसे ज्यादा प्रतिभाशाली आदमी। उनमें अनुभव की आग और तड़प है। हमलोग कहीं न कहीं बुकिश हो जाते हैं। वे जिंदगी से उठाई गई कहानियाँ लिखते थे।” 1 रचनात्मकता, संवेदना और वैचारिकता के साथ विपरीत परिस्थितियों में अंत तक रचनारत रहते हुए इतना विपुल गद्य लेखन करनेवाले विलक्षण प्रतिभा के धनी शैलेश मटियानी को कैलाश चन्द्र पंत उचित ही “गद्य-पुरुष”2 कहते हैं।

Key Words

Shailesh, Matiyani, Prem

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"SHAILESH MATIYANI: ARDHANGINI AUR DAMPATYA PREM", International Journal of Emerging Technologies and Innovative Research (www.jetir.org | UGC and issn Approved), ISSN:2349-5162, Vol.7, Issue 11, page no. pp855-859, November-2020, Available at : http://www.jetir.org/papers/JETIR2011112.pdf

Publication Details

Published Paper ID: JETIR2011112
Registration ID: 303183
Published In: Volume 7 | Issue 11 | Year November-2020
DOI (Digital Object Identifier):
Page No: 855-859
ISSN Number: 2349-5162

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"SHAILESH MATIYANI: ARDHANGINI AUR DAMPATYA PREM", International Journal of Emerging Technologies and Innovative Research (www.jetir.org | UGC and issn Approved), ISSN:2349-5162, Vol.7, Issue 11, page no. pp855-859, November-2020, Available at : http://www.jetir.org/papers/JETIR2011112.pdf




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