UGC Approved Journal no 63975

ISSN: 2349-5162 | ESTD Year : 2014
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Volume 9 | Issue 8 | August 2022

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Published in:

Volume 9 Issue 4
April-2022
eISSN: 2349-5162

UGC and ISSN approved 7.95 impact factor UGC Approved Journal no 63975

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Published Paper ID:
JETIR2204585


Registration ID:
401045

Page Number

f669-f673

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Jetir RMS

Title

BRIDDHA JANO PAR UPBHOKTAVADEE SANSKRITI KE DUSHPRABHAV KA ADHYAYAN

Abstract

सारांश परिवर्तन प्रकृति का शाश्वत नियम है । वृद्धजनों की बढ़ती हुई आवादी भारत की ही नहीं, अपितु विश्वपरक चुनौती तथा समस्या है । वैज्ञानिक प्रगति, औद्योगीकरण, नगरीकरण, लौकिकीकरण आदि प्रक्रियाओं ने सामूहिक एवं संतुलित मान्यताओं के स्थान पर व्यक्तिवादी और असंतुलित प्रवृत्तियों को प्रश्रय दिया है । सामाजिक समरसता और ताने-बाने का परंपरागत और संतुलित स्वरूप विकृत होता जा रहा है । आज बुज़ुर्गों की समस्याओं के कारणों को खोजने एवं उन कारणों पर प्रहार करने की आवश्यकता है, जिससे वृद्धजनों की संध्याबेला की समस्याओं का उन्मूलन किया जा सके । संबंधों की बंजर धरती से स्वार्थ के ही बीज उद्भूत और पल्लवित हो रहे हैं । शुष्कहृदय संतानों का वृद्धजनों के साथ व्यवहार का आधार घोर उपयोगितावादी, व्यक्तिवादी और उपभोक्तावादी दृष्टिकोण है । सूचना और प्रौद्योगिकी के प्रसार ने जहाँ एक ओर संपूर्ण विश्व को एक विश्व ग्राम में परिवर्तित कर दिया है, वहीं दूसरी ओर अनेक परंपरागत मूल्यों जैसेः कर्त्तव्य, आस्था, प्रेम, सौहार्द आदि को ही ओझल कर दिया है । वृद्धजनों की देखभाल को नई पीढ़ी द्वारा आर्थिक घाटे का कृत्य माना जा रहा है । आज वृद्धजनों की सांध्यबेला की परिणति शारीरिक-मानसिक जीर्णता के साथ-साथ अकेलापन, विवशता, तिरस्कार आदि समस्याओं में हो रही है ।

Key Words

उपभोक्तावादी संस्कृति, आधुनिकीकरण, औद्योगीकरण, नगरीकरण, लौकिकीकरण, उपयोगितावादी दृष्टिकोंण, समायोजनकारी मूल्य, प्रजननमूलक परिवार, उपयोगितावाद, प्राथमिक समूह ।

Cite This Article

"BRIDDHA JANO PAR UPBHOKTAVADEE SANSKRITI KE DUSHPRABHAV KA ADHYAYAN", International Journal of Emerging Technologies and Innovative Research (www.jetir.org), ISSN:2349-5162, Vol.9, Issue 4, page no.f669-f673, April-2022, Available :http://www.jetir.org/papers/JETIR2204585.pdf

ISSN


2349-5162 | Impact Factor 7.95 Calculate by Google Scholar

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"BRIDDHA JANO PAR UPBHOKTAVADEE SANSKRITI KE DUSHPRABHAV KA ADHYAYAN", International Journal of Emerging Technologies and Innovative Research (www.jetir.org | UGC and issn Approved), ISSN:2349-5162, Vol.9, Issue 4, page no. ppf669-f673, April-2022, Available at : http://www.jetir.org/papers/JETIR2204585.pdf

Publication Details

Published Paper ID: JETIR2204585
Registration ID: 401045
Published In: Volume 9 | Issue 4 | Year April-2022
DOI (Digital Object Identifier): http://doi.one/10.1729/Journal.30007
Page No: f669-f673
Country: PRAYAGRAJ, उत्‍तर प्रदेश, India .
Area: Arts
ISSN Number: 2349-5162
Publisher: IJ Publication


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