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ISSN: 2349-5162 | ESTD Year : 2014
Volume 12 | Issue 11 | November 2025

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Published in:

Volume 12 Issue 11
November-2025
eISSN: 2349-5162

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Published Paper ID:
JETIR2511417


Registration ID:
571909

Page Number

e142-e146

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Jetir RMS

Title

Naari ka Saahityik Prabhaav: Shaastriya se Aadhunik tak

Abstract

सारांश(Abstract) ‘शास्त्रीय’ शब्द सुनते ही मानव मन में उच्चता, मर्यादा और उत्कृष्टता की छवि उभरती है। भारतीय शास्त्रीय साहित्य—वेद, उपनिषद्, महाकाव्य, पुराण, काव्य, नाटक और स्मृति—सामाजिक, दार्शनिक और आध्यात्मिक चेतना का सर्वोच्च रूप माना जाता है। इस साहित्य में स्त्री को कभी देवी के रूप में, कभी त्याग और पवित्रता की मूर्ति के रूप में, तो कभी एक मानवीय संघर्षशील व्यक्तित्व के रूप में चित्रित किया गया है। सीता, द्रौपदी, सावित्री, गार्गी, मैत्रेयी जैसी स्त्रियाँ त्याग, ज्ञान, निष्ठा और विद्रोह—सभी का सम्मिलित स्वरूप धारण करती हैं। शास्त्रीय साहित्य में स्त्री की भूमिका सामाजिक मूल्यों और धर्मनिष्ठ आदर्शों से जुड़ी थी, जिसके प्रभाव आधुनिक साहित्य तक गहराई से पहुँचे। उन्नीसवीं–बीसवीं शताब्दी में आधुनिक साहित्य के उदय के साथ ही स्त्री के पारंपरिक स्वरूप पर प्रश्न उठने लगे। अब वह केवल गृहकेंद्रित या आज्ञाकारी नहीं रही, बल्कि अपनी स्वतंत्र पहचान, स्वप्न और चेतना को व्यक्त करने लगी। टैगोर की चारुलता और बिमला, शरतचन्द्र की ललिता और कुमुद, तथा आधुनिक नारीवादी लेखिकाएँ—बेगम रुकैया, महाश्वेता देवी, आशापूर्णा देवी—स्त्री की नई छवि गढ़ती हैं, जो आत्मसम्मान, संघर्ष और विचार-स्वातंत्र्य को प्रधानता देती है। शास्त्रीय साहित्य से प्राप्त त्याग, पवित्रता और मर्यादा के आदर्श आधुनिक साहित्य में पुनर्परिभाषित होते हैं। आधुनिक लेखन इन आदर्शों को चुनौती देता है तथा स्त्री को प्रतीक नहीं, बल्कि विचारशील, संवेदनशील और स्वतंत्र मनुष्य के रूप में देखने का आग्रह करता है। इस प्रकार शास्त्रीय से आधुनिक साहित्य की स्त्री-यात्रा भारतीय सांस्कृतिक चेतना के विकास की गाथा है।

Key Words

भारत, स्त्री-चेतना, ज्ञान, त्याग, आधुनिक साहित्य, पहचान, मूल्य, पवित्रता।

Cite This Article

"Naari ka Saahityik Prabhaav: Shaastriya se Aadhunik tak", International Journal of Emerging Technologies and Innovative Research (www.jetir.org), ISSN:2349-5162, Vol.12, Issue 11, page no.e142-e146, November-2025, Available :http://www.jetir.org/papers/JETIR2511417.pdf

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"Naari ka Saahityik Prabhaav: Shaastriya se Aadhunik tak", International Journal of Emerging Technologies and Innovative Research (www.jetir.org | UGC and issn Approved), ISSN:2349-5162, Vol.12, Issue 11, page no. ppe142-e146, November-2025, Available at : http://www.jetir.org/papers/JETIR2511417.pdf

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Published Paper ID: JETIR2511417
Registration ID: 571909
Published In: Volume 12 | Issue 11 | Year November-2025
DOI (Digital Object Identifier):
Page No: e142-e146
Country: North 24 Parganas, West Bengal, India .
Area: Arts
ISSN Number: 2349-5162
Publisher: IJ Publication


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