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ISSN: 2349-5162 | ESTD Year : 2014
Volume 13 | Issue 3 | March 2026

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Published in:

Volume 13 Issue 1
January-2026
eISSN: 2349-5162

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Published Paper ID:
JETIR2601506


Registration ID:
575108

Page Number

f41-f44

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Jetir RMS

Title

शिक्षा का अधिकार अधिनियम और जनजातीय बालिकाओं का शैक्षणिक अध्ययन: प्रतापगढ़ जिले का समाजशास्त्रीय अध्ययन: जनजाति

Abstract

शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 भारत में समावेशी एवं समान शिक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण संवैधानिक पहल है। इस अधिनियम का उद्देश्य 6 से 14 वर्ष आयु वर्ग के प्रत्येक बच्चे को निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा उपलब्ध कराना है। किंतु जनजातीय क्षेत्रों में, विशेषकर जनजातीय बालिकाओं के संदर्भ में, इस अधिनियम के प्रभाव और क्रियान्वयन की स्थिति अभी भी अनेक सामाजिक-सांस्कृतिक, आर्थिक एवं भौगोलिक चुनौतियों से घिरी हुई है। प्रस्तुत समाजशास्त्रीय अध्ययन राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले में निवास करने वाली जनजातीय बालिकाओं की शिक्षा की स्थिति का विश्लेषण करता है, जिसमें उनकी सामाजिक-सांस्कृतिक पृष्ठभूमि के संदर्भ में शिक्षा का अधिकार अधिनियम की भूमिका को समझने का प्रयास किया गया है। प्रतापगढ़ जिला जनजातीय बहुल क्षेत्र है, जहाँ भील, मीणा, गरासिया एवं अन्य जनजातियाँ निवास करती हैं। इन समुदायों की सामाजिक संरचना, परंपराएँ, रीति-रिवाज, आजीविका के साधन, लैंगिक भूमिकाएँ तथा पारिवारिक मूल्यों का प्रत्यक्ष प्रभाव बालिकाओं की शिक्षा पर पड़ता है। अध्ययन से स्पष्ट होता है कि यद्यपि शिक्षा का अधिकार अधिनियम के अंतर्गत विद्यालयों की स्थापना, मध्यान्ह भोजन, निःशुल्क पाठ्य-पुस्तकें, छात्रवृत्तियाँ एवं बालिका प्रोत्साहन योजनाएँ उपलब्ध कराई गई हैं, फिर भी बालिकाओं का नामांकन, नियमित उपस्थिति और उच्च कक्षाओं में ठहराव अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुँच सका है। जनजातीय समाज में प्रचलित पारंपरिक सोच, कम उम्र में विवाह, घरेलू कार्यों एवं कृषि-आधारित श्रम में बालिकाओं की भागीदारी, शिक्षा के प्रति सीमित जागरूकता तथा विद्यालयों की भौगोलिक दूरी जैसे कारक बालिकाओं की शिक्षा में प्रमुख बाधाएँ हैं। इसके अतिरिक्त भाषा की समस्या, सांस्कृतिक असंगति और महिला शिक्षकों की कमी भी शिक्षा की गुणवत्ता को प्रभावित करती है। समाजशास्त्रीय दृष्टि से यह अध्ययन दर्शाता है कि केवल कानूनी प्रावधान पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि सामाजिक-सांस्कृतिक संदर्भों को समझते हुए समुदाय-आधारित सहभागिता, अभिभावकों की जागरूकता तथा स्थानीय परंपराओं के अनुकूल शैक्षणिक वातावरण का निर्माण आवश्यक है।शिक्षा का अधिकार अधिनियम ने प्रतापगढ़ जिले की जनजातीय बालिकाओं के लिए शिक्षा के अवसरों के द्वार अवश्य खोले हैं, किंतु इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सामाजिक-सांस्कृतिक बाधाओं को दूर करना अनिवार्य है। जब तक शिक्षा को जनजातीय समाज की सांस्कृतिक पहचान, जीवन-शैली और आवश्यकताओं से जोड़कर नहीं देखा जाएगा, तब तक बालिकाओं की शिक्षा में अपेक्षित परिवर्तन संभव नहीं होगा। यह अध्ययन नीति-निर्माताओं, शिक्षाविदों एवं समाजशास्त्रियों के लिए जनजातीय बालिका शिक्षा के क्षेत्र में व्यावहारिक एवं संवेदनशील हस्तक्षेपों की आवश्यकता को रेखांकित करता है।

Key Words

शिक्षा का अधिकार अधिनियम, जनजातीय बालिकाएँ, प्रतापगढ़ जिला, समाजशास्त्रीय अध्ययन, जनजातीय समाज, सामाजिक-सांस्कृतिक पृष्ठभूमि, बालिका शिक्षा, शैक्षणिक स्थिति, नामांकन, विद्यालय छोड़ने की प्रवृत्ति, लैंगिक असमानता, पारंपरिक मान्यताएँ, शिक्षा में बाधाएँ, सरकारी योजनाएँ, समावेशी शिक्षा, जागरूकता, समुदाय सहभागिता, शैक्षिक विकास, ग्रामीण जनजातीय क्षेत्र, शिक्षा नीति

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"शिक्षा का अधिकार अधिनियम और जनजातीय बालिकाओं का शैक्षणिक अध्ययन: प्रतापगढ़ जिले का समाजशास्त्रीय अध्ययन: जनजाति ", International Journal of Emerging Technologies and Innovative Research (www.jetir.org), ISSN:2349-5162, Vol.13, Issue 1, page no.f41-f44, January-2026, Available :http://www.jetir.org/papers/JETIR2601506.pdf

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"शिक्षा का अधिकार अधिनियम और जनजातीय बालिकाओं का शैक्षणिक अध्ययन: प्रतापगढ़ जिले का समाजशास्त्रीय अध्ययन: जनजाति ", International Journal of Emerging Technologies and Innovative Research (www.jetir.org | UGC and issn Approved), ISSN:2349-5162, Vol.13, Issue 1, page no. ppf41-f44, January-2026, Available at : http://www.jetir.org/papers/JETIR2601506.pdf

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Published Paper ID: JETIR2601506
Registration ID: 575108
Published In: Volume 13 | Issue 1 | Year January-2026
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Page No: f41-f44
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ISSN Number: 2349-5162
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