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ISSN: 2349-5162 | ESTD Year : 2014
Volume 13 | Issue 10 | October 2026

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Published in:

Volume 13 Issue 10
October-2026
eISSN: 2349-5162

UGC and ISSN approved 7.95 impact factor UGC Approved Journal no 63975

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Published Paper ID:
JETIR2610215


Registration ID:
587200

Page Number

c112-c122

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Jetir RMS

Title

An Archaeological and Epigraphic Study of Lal Pahadi, Lai, and Balgudar: From Ancient Krimila to Medieval Lakhisarai

Abstract

बिहार के वर्तमान लखीसराय का ऐतिहासिक महत्त्व केवल आधुनिक जिले की सीमाओं के भीतर रहकर पूरी तरह नहीं समझा जा सकता। यह क्षेत्र एक व्यापक ऐतिहासिक भूदृश्य का अंग था, जिसे प्रारंभिक मध्यकालीन स्रोतों में क्रिमिला (Krimilā), क्रिमिला-विषय और क्रिमिलाधिष्ठान के नाम से जाना गया है। लाल पहाड़ी, लई और बलगुदर जैसे पुरातात्त्विक स्थल इस क्षेत्र के राजनीतिक, धार्मिक, आर्थिक और सामाजिक इतिहास के पुनर्निर्माण के लिए महत्त्वपूर्ण साक्ष्य प्रस्तुत करते हैं। इन स्थलों में बलगुदर अपने अभिलेखीय साक्ष्य के कारण विशेष महत्त्व रखता है। वलगुदर (बलगुदर) से प्राप्त तीन अभिलेख, जिन्हें डी. सी. सरकार ने प्रकाशित किया, क्रिमिला तथा क्रिमिलाधिष्ठान का उल्लेख करते हैं। ये अभिलेख बलगुदर क्षेत्र को ऐतिहासिक क्रिमिला से जोड़ने का महत्त्वपूर्ण आधार देते हैं (Sircar 137–45)। साथ ही ये यह भी दर्शाते हैं कि धर्मपाल के काल से लेकर परवर्ती पाल काल तक यह क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से सक्रिय बना रहा। लाल पहाड़ी इस ऐतिहासिक भूदृश्य का एक भिन्न किंतु पूरक आयाम प्रस्तुत करती है। वर्ष 2017 से 2021 के बीच हुए पुरातात्त्विक उत्खननों में एक विशाल बौद्ध विहार-परिसर प्रकाश में आया, जिसकी पहचान उत्खनन-प्रतिवेदन में श्रीमद् धर्म विहार के रूप में की गई है। इसकी वर्गाकार योजना, केंद्रीय आँगन, आवासीय कक्ष, बरामदे, जल-निकासी की व्यवस्था, ईंटों की संरचनाएँ, मूर्तियाँ, अभिलेख और अन्य पुरावशेष एक सुसंगठित मठीय संस्था के अस्तित्व की ओर संकेत करते हैं (Kumar 33–72)। वैज्ञानिक विश्लेषण उत्खनित विहार के प्रमुख आवासन-काल को ग्यारहवीं शताब्दी के उत्तरार्ध से बारहवीं शताब्दी के उत्तरार्ध के बीच रखता है (Kumar 321–52)। यह स्थल पूर्वी भारत की बौद्ध धार्मिक परंपराओं के अध्ययन की दृष्टि से भी महत्त्वपूर्ण है। लाल पहाड़ी से संबद्ध मूर्तिकला और पुरातात्त्विक साक्ष्य उस महायान-वज्रयान धार्मिक परिवेश को प्रतिबिंबित करते हैं जो प्रारंभिक मध्यकाल में पूर्वी भारत में विकसित हुआ (Kumar 261–314)। भिक्षुणी विजयश्री भद्रा और दानदात्री मल्लिका देवी से जुड़े साक्ष्य बौद्ध धार्मिक संस्थाओं में स्त्रियों की सहभागिता पर भी महत्त्वपूर्ण प्रकाश डालते हैं (Kumar 261–314)। लई से प्राप्त विक्रमादेवी का अभिलेख क्षेत्र के सामाजिक इतिहास का एक और आयाम खोलता है। इसमें यक्षपाल की पट्टमहिषी (प्रमुख रानी) विक्रमादेवी द्वारा एक प्रतिमा के निर्माण का उल्लेख है। यक्षपाल की पहचान दानपति और वासागारिक जैसी उपाधियों से होती है, जो किसी महत्त्वपूर्ण प्रशासनिक अथवा दरबारी पद की ओर संकेत करती हैं (Inscriptions of Bihar 118)। यह अभिलेख इसलिए विशेष है कि यह अभिजात सामाजिक परिवेश की एक स्त्री के धार्मिक संरक्षण को दर्ज करता है। समग्र रूप से देखें तो लाल पहाड़ी, लई और बलगुदर को केवल पृथक पुरातात्त्विक स्थलों के रूप में नहीं, बल्कि प्राचीन क्रिमिला से संबद्ध एक व्यापक सांस्कृतिक भूदृश्य के विभिन्न घटकों के रूप में समझा जा सकता है। बलगुदर इसका प्रशासनिक एवं नगरीय आयाम, लाल पहाड़ी बौद्ध मठीय आयाम तथा लई अभिजात सामाजिक-धार्मिक आयाम का प्रतिनिधित्व करता है। इनका संयुक्त अध्ययन धर्म, राजसत्ता, नगरीय जीवन, संरक्षण, कलात्मक उत्पादन और स्थानीय समाज के बीच जटिल अंतर्क्रिया को उजागर करता है।

Key Words

क्रिमिला, लखीसराय, लाल पहाड़ी, श्रीमद् धर्म विहार, लई, बलगुदर, पाल वंश, धर्मपाल, यक्षपाल, विक्रमादेवी, अभिलेखशास्त्र, पुरातत्त्व।

Cite This Article

"An Archaeological and Epigraphic Study of Lal Pahadi, Lai, and Balgudar: From Ancient Krimila to Medieval Lakhisarai", International Journal of Emerging Technologies and Innovative Research (www.jetir.org), ISSN:2349-5162, Vol.13, Issue 10, page no.c112-c122, October-2026, Available :http://www.jetir.org/papers/JETIR2610215.pdf

ISSN


2349-5162 | Impact Factor 7.95 Calculate by Google Scholar

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"An Archaeological and Epigraphic Study of Lal Pahadi, Lai, and Balgudar: From Ancient Krimila to Medieval Lakhisarai", International Journal of Emerging Technologies and Innovative Research (www.jetir.org | UGC and issn Approved), ISSN:2349-5162, Vol.13, Issue 10, page no. ppc112-c122, October-2026, Available at : http://www.jetir.org/papers/JETIR2610215.pdf

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Published Paper ID: JETIR2610215
Registration ID: 587200
Published In: Volume 13 | Issue 10 | Year October-2026
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Page No: c112-c122
Country: patna, bihar, India .
Area: Other
ISSN Number: 2349-5162
Publisher: IJ Publication


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